बैलाडीला खदान क्षेत्रों में विश्वकर्मा जयंती पर एनएमडीसी द्वारा प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई जिससे आर्थिक नुकसान की आशंका, स्थानीय व्यापारियों में रोष।


किरंडुल जिला दंतेवाड़ा 17 सितंबर 2025: हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी विश्वकर्मा जयंती पर एनएमडीसी के बैलाडीला खदान क्षेत्रों में उत्साहपूर्वक कार्यक्रम आयोजित होने हैं। इस खास दिन खदानों की सारी गतिविधियां थम जाती हैं, जो सैलानियों के लिए साल भर का इकलौता अवसर होता है। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से लेकर ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे सीमांत राज्यों से हजारों पर्यटक बैलाडीला की मनमोहक पहाड़ियों, एनएमडीसी की विशाल लौह अयस्क खदानों, बैल की डील जैसे आकर्षक पहाड़ों और घुमावदार रास्तों का दीदार करने पहुंचते हैं। लेकिन पिछले दो वर्षों से सुरक्षा चिंताओं, अत्यधिक वर्षा और भूस्खलन के बहाने सैलानियों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है, जिससे स्थानीय लोगों में व्यापक रोष फैल गया है।

किरंडुल पालिका उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी ने बताया, "साल में बस एक ही दिन मिलता है जब लोग बैलाडीला की प्राकृतिक सुंदरता को निहारने दूर-दूर से आते हैं। इससे शहर का माहौल एकदम बदल जाता है। आर्थिक व्यवस्था कई गुना बढ़ जाती है। छोटे व्यापारी, होटल और लॉज संचालक, टैक्सी चालक सहित सभी को रोजगार के नए अवसर मिलते हैं। सैलानियों पर यह प्रतिबंध शहर को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है।" सिद्दीकी ने आगे कहा कि ये पर्यटक बैलाडीला घूमने के बाद मुफ्त में ही एनएमडीसी की खदानों, पहाड़ियों और दंतेवाड़ा जिले का प्रचार करते हैं, जो जिले की छवि को नई ऊंचाइयों पर ले जाता है।

एक ओर जिला प्रशासन दंतेवाड़ा को पर्यटक जिले के रूप में विकसित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। इसके लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, पर्यटन स्थलों का निर्माण और प्रचार-प्रसार हो रहा है। दूसरी ओर, एनएमडीसी का यह प्रतिबंधात्मक रवैया समझ से परे है। छत्तीसगढ़ शासन और केंद्र सरकार भी जिले को नक्सल प्रभावित क्षेत्र से उबारकर पर्यटन हब बनाने की दिशा में सक्रिय हैं, लेकिन ऐसी पाबंदियां इन प्रयासों पर पानी फेर रही हैं।

स्थानीय व्यापारियों और निवासियों का कहना है कि विश्वकर्मा जयंती पर बैलाडीला की खदानों में प्रवेश की अनुमति साल भर का सबसे बड़ा आकर्षण है। पुरानी रिपोर्टों के अनुसार, यह दिन 'बैलाडीला मेला' का रूप ले लेता था, जहां सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ आती थी। लेकिन हाल के वर्षों में लगी पाबंदियों ने इस परंपरा को प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा उपायों के साथ सीमित प्रवेश की अनुमति देकर पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है, जो जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा।

जिला प्रशासन से संपर्क करने पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं मिली, लेकिन सिद्दीकी ने आशा जताई कि उच्च अधिकारियों का हस्तक्षेप होगा और इस वर्ष सैलानियों को प्रवेश की अनुमति मिलेगी। अन्यथा, स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई जा रही है।



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