बचेली :- आज बचेली स्थित श्री स्वामी शरणम् अय्यप्पा मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, दीप आराधना और शंखनाद के साथ मंदिर के पवित्र कपाट विधिवत खोल दिए गए। सुबह से ही मंदिर परिसर “स्वामी शरणम्” के जयघोष से गूंज उठा। परंपरागत विधि-विधान के साथ पुजारी वासुदेवन पोती ने गणपति होमम, पंचामृत अभिषेक, चंदन लेपन एवं आभूषण श्रृंगार कर भगवान अय्यप्पा की विशेष पूजा सम्पन्न कराई।
आज से शुरू हुई 41 दिनों की मंडला व्रत पूजा भक्तों के लिए आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण अवसर है। इस अवधि में व्रतधारी माला धारण कर कठोर नियमों का पालन करते हैं और रोज सुबह–शाम की पूजा में शामिल होकर आध्यात्मिक अनुशासन को अपनाते हैं। इसी व्रत का समापन प्रसिद्ध शबरीमला यात्रा से होता है, जहां भक्त भगवान अय्यप्पा के पवित्र दर्शन करते हैं।
शबरीमला और अय्यप्पा स्वामी: जानिए कुछ रोचक तथ्य
भगवान अय्यप्पा को धर्म, संयम और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है।
शबरीमला के पर्वतों के मध्य स्थित यह मंदिर दक्षिण भारत के सबसे पवित्र तीर्थों में से एक है।
यहां के मुख्य मार्ग 18 पवित्र सीढ़ियों से होकर जाता है, जिसे “पट्टिनेट्टु पडी” कहा जाता है, जो जीवन की 18 बंधनों और गुणों का प्रतीक है।
शबरीमला में ‘स्वामीये शरणम् अय्यप्पा’ का जयघोष भक्तों के रोम रोम में भक्ति और शक्ति भर देता है।
ऐसा माना जाता है कि जिन लोगों पर शनि के दोष होते हैं, वे अय्यप्पा स्वामी की पूजा और दर्शन मात्र से राहत पाते हैं।
विशेष पूजा से भक्त आनंदित
मंदिर में शनि देव की शांति हेतु पूजा शुक्रवार,मंगलवार का भगवती सेवा, शाम की दीप आराधना, गणपति होमम, पंचामृत अभिषेक, चंदन लेपन और अन्य विशेष पूजा विधियां भक्तों को आध्यात्मिक आनंद प्रदान करती हैं। पूजा करवाने के इच्छुक भक्त मंदिर समिति के सचिव जिजिल कुमार से संपर्क कर सकते हैं। वर्तमान में समिति के अध्यक्ष अजीतन नायर और कोषाध्यक्ष श्रीजीत हैं।
अय्यप्पा सेवा समिति पिछले 40 वर्षों से इस महापूजा का आयोजन कर रही है। मंदिर की स्थापना 8 फरवरी 1987 को केरल से आए विशेष तन्त्रियों द्वारा विधिवत की गई थी।
मंदिर परिसर में आज दिव्य वातावरण बना रहा। भक्तों ने “स्वामी शरणम्” का जयघोष करते हुए भगवान अय्यप्पा से पूरे क्षेत्र की मंगलकामना की।


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