किरंदुल-बचेली की दो बड़ी जनसमस्याओं पर उठी आवाज़: अस्पताल भवन बंद, बस स्टैंड उपेक्षित, शौचालय व्यवस्था लचर।*

 *किरंदुल-बचेली की दो बड़ी जनसमस्याओं पर उठी आवाज़: अस्पताल भवन बंद, बस स्टैंड उपेक्षित, शौचालय व्यवस्था लचर।*

जिला दंतेवाड़ा

जनहित के मुद्दों को लेकर सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता प्रवेश कुमार जोशी ने दंतेवाड़ा कलेक्टर को दो अलग-अलग पत्रों के माध्यम से किरंदुल और बचेली नगर की गंभीर समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है। दोनों ही मामले न केवल जनसुविधा से जुड़े हैं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और सरकारी संसाधनों के उपयोग से भी संबंधित हैं।


किरंदुल नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 2 में एक विशाल और भव्य भवन का निर्माण पूर्ण हो चुका है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह भवन संभवतः एक सरकारी अस्पताल के रूप में निर्मित किया गया था। लेकिन वास्तविकता यह है कि यह भवन आज तक बंद पड़ा है, और ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ लोग उसमें अस्थायी रूप से निवासरत भी हैं।


जिस पर प्रवेश जोशी ने कलेक्टर से मांग की है कि,


- भवन का स्थल निरीक्षण (फोटो प्रमाण सहित) कराया जाए।  

- यह पता लगाया जाए कि इसका निर्माण किस उद्देश्य से हुआ, कब पूर्ण हुआ, और अब तक संचालन क्यों नहीं हुआ।  

- यदि यह अस्पताल है तो उसका शीघ्र संचालन सुनिश्चित किया जाए, अन्यथा इसे किसी अन्य शासकीय योजना के अंतर्गत उपयोग में लाया जाए, ताकि जनता को लाभ मिल सके और सरकारी निधियों का समुचित उपयोग हो।


बचेली नगर की एक गंभीर समस्या है— बसों का बस स्टैंड में प्रवेश न करना। किरंदुल से जगदलपुर, रायपुर और अन्य गंतव्यों की ओर जाने वाली अधिकांश बसें बचेली पुलिस थाना के पास मुख्य सड़क पर ही रुकती हैं, जिससे यात्रियों को सड़क पार करने में जोखिम उठाना पड़ता है। महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे और गर्भवती महिलाएं मुख्य सड़क पर खड़े होकर बस का इंतजार करती हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।


जोशी ने मांग की है कि,


- बसों की गतिविधियों की फोटो/वीडियो प्रूफ जांच कराई जाए।  

- सभी बसों को अनिवार्य रूप से बस स्टैंड के भीतर प्रवेश करने के निर्देश दिए जाएं।  

- इससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और नगर की यातायात व्यवस्था में सुधार आएगा।


बचेली नगर के मुख्य सड़क मार्ग पर सुलभ शौचालय की अनुपलब्धता भी एक बड़ी समस्या है। वर्तमान में जो शौचालय है, वह बाजार क्षेत्र के अंदर स्थित है, जिससे यात्रियों को बस छूटने का डर बना रहता है। महिलाओं, वृद्धों और विशेष रूप से डायबिटीज़ के मरीजों को भारी असुविधा होती है। इसलिए


- मुख्य सड़क मार्ग पर नवीन सुलभ शौचालय का निर्माण किया जाए।  

- इसके लिए स्थल चयन, फंड आबंटन और संचालन योजना तैयार की जाए।  

- नगर पालिका के माध्यम से इसका नियमित संचालन हो, जिससे जनसुविधा के साथ-साथ राजस्व भी उत्पन्न हो सके।


प्रवेश जोशी ने विश्वास जताया है कि जिला प्रशासन इन दोनों जनहितकारी विषयों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह केवल दो नगरों की समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और संसाधनों के न्यायसंगत उपयोग का प्रश्न है।

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