बाल संरक्षण को लेकर पुलिस अधिकारियों की एक दिवसीय कार्यशाला, POCSO एक्ट और किशोर न्याय अधिनियम पर दिया प्रशिक्षण
दंतेवाड़ा, 22 अगस्त 2026
बच्चों के संरक्षण और उनके विरुद्ध होने वाले अपराधों की रोकथाम को लेकर दंतेवाड़ा पुलिस द्वारा एक दिवसीय बाल संरक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। रक्षित केंद्र स्थित डीआरजी कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित इस कार्यशाला में जिले के विभिन्न थानों में पदस्थ बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों को POCSO एक्ट एवं किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों और उनकी प्रभावी कार्रवाई के संबंध में विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया।
यह महत्वपूर्ण कार्यशाला पुलिस अधीक्षक दंतेवाड़ा चन्द्रमोहन सिंह (भा.पु.से.) एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र कुमार खूंटे के निर्देशन तथा विशेष किशोर पुलिस इकाई की नोडल अधिकारी व उप पुलिस अधीक्षक आकांक्षा सिंह ठाकुर के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। इस दौरान UNICEF रायपुर के विषय विशेषज्ञ विपिन ठाकुर एवं राम वर्मा ने उपस्थित पुलिस अधिकारियों को बारीकियों से अवगत कराते हुए प्रशिक्षण प्रदान किया।
संवेदनशील मामलों में पुलिस की भूमिका पर जोर
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बच्चों के विरुद्ध होने वाले लैंगिक अपराधों की प्रकृति, POCSO एक्ट के कानूनी प्रावधान, पीड़ित बच्चे की मानसिक व सामाजिक आवश्यकताओं तथा संवेदनशील मामलों में पुलिस की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बच्चों के विरुद्ध होने वाले लैंगिक अपराधों की प्रकृति, POCSO एक्ट के कानूनी प्रावधान, पीड़ित बच्चे की मानसिक व सामाजिक आवश्यकताओं तथा संवेदनशील मामलों में पुलिस की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी गई।
त्वरित और विधिसम्मत कार्रवाई के निर्देश
कार्यशाला में अधिकारियों को अपराध की सही पहचान करने और POCSO एक्ट के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का व्यावहारिक ज्ञान भी दिया गया। इसका मुख्य उद्देश्य मैदानी स्तर पर तैनात पुलिस अधिकारियों को सक्षम बनाना है, ताकि बच्चों से जुड़े मामलों में त्वरित, संवेदनशील, पारदर्शी एवं विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। कार्यशाला में जिले के पुलिस अधिकारी और किशोर पुलिस इकाई के सदस्य मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
कार्यशाला में अधिकारियों को अपराध की सही पहचान करने और POCSO एक्ट के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का व्यावहारिक ज्ञान भी दिया गया। इसका मुख्य उद्देश्य मैदानी स्तर पर तैनात पुलिस अधिकारियों को सक्षम बनाना है, ताकि बच्चों से जुड़े मामलों में त्वरित, संवेदनशील, पारदर्शी एवं विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। कार्यशाला में जिले के पुलिस अधिकारी और किशोर पुलिस इकाई के सदस्य मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

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