*शिक्षा मंदिर की दुर्दशा - छत से टपकता पानी, टूटे दरवाजे और बाल्टी में पढ़ाई, CM हेल्पलाइन 1076 में गूंजा किरन्दुल के बच्चों का दर्द*


*शिक्षा मंदिर की दुर्दशा - छत से टपकता पानी, टूटे दरवाजे और बाल्टी में पढ़ाई, CM हेल्पलाइन 1076 में गूंजा किरन्दुल के बच्चों का दर्द*

*किरन्दुल, दंतेवाड़ा।* एक तरफ सरकार शिक्षा को गुणवत्ता युक्त बनाने और स्कूलों के जीर्णोद्धार के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ दंतेवाड़ा जिले के किरन्दुल की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है।

नगर पालिका परिषद किरन्दुल के *वार्ड क्रमांक 03, गजराज कैंप स्थित 51 साल पुरानी शासकीय प्राथमिक शाला कोड़ीनार नंबर 1 (शाला कोड - 22161918301, स्थापना वर्ष 1975)* की हालत देखकर कोई भी कहेगा कि यहाँ शिक्षा नहीं, मजबूरी में कक्षाएं चल रही हैं।

विद्यालय की इस जर्जर स्थिति को लेकर समाजसेवी *श्री प्रवेश कुमार जोशी* ने *CM हेल्पलाइन 1076* में शिकायत दर्ज कराई है।

*शिकायत टोकन नं. WP260900173314* दिनांक 01.09.2026 को स्कूल शिक्षा विभाग के नाम से दर्ज की गई है, जिसे L1 स्तर पर जिला शिक्षा अधिकारी, दंतेवाड़ा को प्रेषित कर प्रक्रियाधीन किया गया है।

शिकायत में उजागर हुईं ये बड़ी समस्याएं, स्कूल की सभी शीटें टूटी-फटी हैं। छत में बड़े-बड़े छेद हैं जिससे दिन में ही रोशनी आर-पार हो रही है। बरसात में यही छेद आफत बन जाते हैं। शिक्षक मजबूरी में कक्षा के अंदर बाल्टी और मग रखकर पढ़ाई कराने को विवश हैं।

स्कूल के दरवाजों में बड़े-बड़े छेद हो गए हैं, खिड़कियां टूटी हुई हैं। शौचालय पूरी तरह जर्जर है, जो छात्राओं के लिए गंभीर सुरक्षा और स्वच्छता का विषय है।


स्कूल की बाउंड्री वाल काफी छोटी है। रात में असामाजिक तत्व दीवार फांदकर अंदर घुसकर तोड़-फोड़ करते हैं। पालकों ने मांग की है कि सुरक्षा हेतु बाउंड्री पर V-शेप एंगल लगाकर तार फेंसिंग की जाए।


स्कूल के सामने एक अनुपयोगी भवन पड़ा है। वार्डवासियों की मांग है कि उसे हटाकर वहाँ बच्चों के लिए एक सुरक्षित खेल मैदान बनाया जाए, जो मोहल्ले के सामाजिक कार्यों में भी काम आ सके।


इस शिकायत में स्थानीय *वार्ड पार्षद श्रीमती देवकी ठाकुर (वार्ड क्र. 3, मो. 9981197463)* का भी समर्थन प्राप्त है। पालकों का कहना है कि यह केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि बस्तर के बच्चों के भविष्य का सवाल है।

पालकों की प्रमुख मांगें है कि, विभाग की टीम फोटो/वीडियो के साथ बच्चों, पालकों, पार्षद और शिक्षकों से चर्चा कर रिपोर्ट तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रस्तुत करे।


सरकारी योजना अथवा क्षेत्र की निजी कंपनियों *NMDC / AM/NS India* के *CSR मद* से चरणबद्ध तरीके से शीट, दरवाजे, शौचालय की मरम्मत की जाए। बच्चों को खेल सामग्री उपलब्ध कराई जाए। आगामी शीत ऋतु को देखते हुए बच्चों को जूता, मोजा, स्वेटर प्रदान किया जाए।


शिकायतकर्ता प्रवेश जोशी ने कहा, _"बच्चे अपने CM साहब से एक गिफ्ट के रूप में एक स्वच्छ, सुंदर और हाइजेनिक स्कूल चाहते हैं। ताकि वे बीमारियों से बच सकें और बेहतर वातावरण में पढ़ सकें।"_


अब देखना यह होगा कि 51 साल पुराने इस शिक्षा मंदिर की गूंज CM हेल्पलाइन से होते हुए कब तक जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुँचती है और बच्चों को उनका हक कब मिलता है।

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